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सूर्य की ऊर्जा को बटोरने का मौका है छठ, आप भी ऐसे उठा सकते हैं लाभ

दुनिया की सभी प्राचीन सभ्यताओं में सूर्य को ईश्वर का रूप मानकर पूजा जाता रहा है। धरती पर जीवन का कारण सूर्य ही है। सूर्य के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। वैदिक काल से ही भारत में सूर्य की पूजा होती रही है। यह एक तरीका है प्रकृति को धन्यवाद कहने का। साथ ही सूर्य पूजा के पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं। बिहार और पूर्वी भारत के कुछ इलाकों में सूर्य की पूजा का त्यौहार छठ मनाया जाता है। हम आपको बताएंगे कि अगर आप छठ नहीं मनाते, तो भी आपको छठ के दिन सूर्य की किरणों से मिलने वाली एक विशेष ऊर्जा का लाभ जरूर उठाना चाहिए। छठ के दिन धरती और सूर्य की खगोलीय स्थिति कुछ ऐसी होती है कि सूर्य की किरणों का हमारे शरीर पर अलग तरीके से प्रभाव पड़ता है। यह प्राणियों के जीवन के लिए बहुत सकारात्मक होता है।

छठ के पीछे का विज्ञान

कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की छठी तारीख को छठ मनाया जाता है। मारकंडेय पुराण में इस बारे में विस्तार से बताया गया है कि षष्ठी और सप्तमी को सूर्य धरती के काफी पास होता है और इसका मनुष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। शाम को डूबते सूर्य को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद अगले दिन यानी सप्तमी की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान शरीर सीधे तौर पर उगते और डूबते सूरज की रोशनी के संपर्क में आता है, जिससे कई तरह के सकारात्मक बदलाव होते हैं। यह पाया गया है कि इस दौरान धरती और सूर्य के बीच इस तरह का कोण बनता है कि सूर्य से आने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणों (पराबैगनी) का प्रभाव बढ़ जाता है। यह शरीर को एक नई जीवनी ऊर्जा देता है और कई बीमारियों से बचाव भी करता है।  इसी के आधार पर छठ पर्व की कल्पना की गई है और इसके साथ पूजा की कुछ परंपराएं और मंत्र जोड़ दिए गए हैं।

छठ नहीं मनाते तो क्या हुआ?

छठ एक खास मौका है, जब आप सूर्य की ऊर्जा का लाभ अपने शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य और भाग्य को सुधारने के लिए उठा सकते हैं। लेकिन यदि आपके परिवार में छठ पर्व नहीं मनाया जाता तो भी आपको इस दिन सूर्यास्त और अगले दिन सूर्योदय के समय कुछ देर सूरज के आगे जरूर बिताना चाहिए। इसके लिए आप किसी खुली जगह जैसे मैदान, नदी के किनारे या अपनी छत पर खड़े होकर सूर्य के प्रकाश को अपने शरीर से स्पर्श होने दें। इससे पहले स्नान कर लेना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा के छिद्र खुल जाते हैं और सूर्य की किरणों का पूरी तरह से शरीर को लाभ मिलता है। अगर आप इस दौरान सफेद या पीला सूती कपड़ा पहनें तो फायदा और भी बढ़ जाता है। हो सके तो इस दौरान सूर्य को जल जरूर चढ़ाएं। सिर्फ छठ नहीं, बाकी दिनों में भी आप जल अर्पित करके सूर्य की ऊर्जा का लाभ अपने शरीर तक पहुंचा सकते हैं। अगर आप रोज सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करें तो इसका असर आपके जीवन पर सीधे तौर पर आपको अनुभव होगा। सूर्योदय के समय जल की धारा से होते हुए सूर्य का जो प्रकाश चेहरे और शरीर पर पड़ता है उसके चमत्कारी असर देखे जाते हैं। अगर आप छात्र हैं तो आपको रोज सुबह उगते सूर्य को जल अर्पित जरूर करना चाहिए। इसका प्रभाव अपने व्यक्तित्व, पढ़ाई और करियर पर जरूर पड़ता है। आप चाहें तो इसकी शुरुआत इसी छठ के साथ शुरू कर सकते हैं। बहुत जल्द ही आपको इस प्राचीन भारतीय ज्ञान का असर अपने जीवन पर देखने को मिलने लगेगा।

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